NavHindustan
मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012
मंगलवार, 20 जुलाई 2010
NavHindustan: मोर भंगिया के मनाय द
मोर भंगिया के मनाय द

बोल बम। सावन के आते ही बोल बम का जयकारा लगना शुरू हो जाता है। सावन का महीना हिन्दुओं के लिए सबसे पवित्र महिना माना जाता है। कहा जाता है कि इस पावन महिने में देवों के देव महादेव यानि भगवान शिव अपने भक्तों से मिलने कैलाश छोड़, अपने धाम में विराजमान होते हैं, विशेषकर हरिद्वार के बद्रीनाथ व केदारनाथ में और देवघर के बैद्यनाथधाम में। सावन में इन दोनो तीर्थ स्थानों पर विश्वप्रसिद्ध मेला लगता है। इस पावन महीने में बाबा पर जल चढ़ाने भारत के विभिन्न हिस्सों तथा विदेशों से भी भक्त लाखों-लाख की संख्या में आते हैं। अगर बात हरिद्वार की करें तो उत्तराखण्ड, पश्चिमि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व मध्य प्रदेश के अधिकांश भक्त शिव की अर्चना करने यहां आते हैं, जबकि बिहार, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम जैसे राज्यों तथा पड़ोसी देश नेपाल के अधिकांश भक्त देवघर आते हैं।
भगवान शंकर का नाम आते ही बोल बम का जयकारा लगाने को मन करता है और जुबां पर होता है- जय जय शिव, शंकर कांटा लगे न कंकड़, कि प्याला तेरे नाम का पीया। प्याला तो भगवान के नाम का पीते हैं, मगर प्याले में आखिर होता क्या है- चाय, मदिरा या कुछ और ? जी हां! इस प्याले में होता है भोलेनाथ की बूटी यानि भांग। लोगों का मानना है कि सर्पमाला व सिंह की छाल धारण करने वाले बाबा औघरदानी (प्रभु शिव) द्वारा सेवन किए जाने वाले बूटियों में सबसे प्रमुख भांग, धतूरा एवं गांजा है।और यही वजह है कि इतने नशीले व जहरीले पदार्थों का सेवन करने वाले भोले बाबा ने संसार की रक्षा करने हेतु समुद्र मंथन से निकले विष को सहर्ष पी गए और उसे पचा भी लिया। इसलिए कहते हैं कि पूरे सावन भगवान शिव को जल व पुष्प के अलावा भांग- धतूरा चढ़ाने वालों पर भगवान खुश होकर मनचाहा वरदान देते हैं। तो अगर आपको भी पूरी करवानी हो कोई मुराद तो भैरो बाबा (नंदि) से किजिए पैरवि और कहिए— मोर भंगिया के मनाय द हे भैरो नाथ, मोर भंगिया के मनाय द..........।।
पवन कुमार चौधरी
शनिवार, 17 जुलाई 2010
मिडिया पर हमला – संविधान पर हमला
धर्म रक्षक या धर्म भक्षक
नई दिल्ली। झंडेवालान स्थित विडियोकान टावर में स्थित हेडलाइंस टुडे के दफ्तर पर हमला ना सिर्फ मिडिया की स्तंत्रता पर एक कुठाराघात है बल्कि यह भारतीय संविधान का हनन है। देश की राजधानी दिल्ली के मध्य में स्थित झंडेवालान इलाके का वह इमारत यानि विडियोकान टावर, जहाँ टीवी टुडे ग्रुप के विभिन्न चैनल आजतक, तेज एवं हेडलाइंस टुडे का स्टूडियो व दफ्तर है, शुक्रवार की शाम जब राष्ट्रीय स्वयं सेवक के कार्यकर्ताओं ने हमला बोला, तो यहाँ का नजारा बहुत ही खौफनाक एवं शर्मनाक था। करीब 200 से अधिक की संख्या में संघ सेवक का चोला पहन आए देश के इन गुंडों ने तोड़-फोड़ कर ह सावित कर दिया कि वे धर्म रक्षक नहीं बल्कि धर्म भक्षक हैं।
गुरूवार रात हेडलाइंस टुडे पर दिखाए गए एक स्ट्रींग आपरेशन के विरोध में स प्रकार की दानवीय हरकत इस स्ट्रींग ऐपरेशन की वास्तविकता को दर्शाता है। इतना ही नहीमं हिन्दुत्व की दुहाई देने वाले इन संघ सेवकों में हिन्दुत्व तो क्या मानवता भी नहीं दिखाई देती है।
मिडिया पर हमला यह पहली बार नहीं है। इससे पूर्व भी कई बार व कई रूपों में मिडिया पर हमले होते रहे हैं। बात चाहे पिछले दिनों मुंबई में शिवसैनिकों द्वारा आईबीएन लोकमत के दफ्तर पर हुए हमले की हो, अथवा बिहार में विधायक अनंत सिंह के आवास के अंदर विधायक महोदय के गुर्गों द्वारा दो मिडियाकर्मी को बंधक बनाने की हो। ये सभी घटनाएँ कहीं न कहीं सच्चाई को छिपाने की कोशिश है। संविधान के चौथे स्तंभ पर इतना बड़ा हमला लोकतंत्र पर कुठाराघात है। इस घटना के बाद कई बड़े सवाल खड़े हो चुके हैं। बहरहाल देखना यह है कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है। मिडयाकर्मियों की सुरक्षा में कोई कड़ा कदम उठाया जाएगा या फिर इन समाज के ठेकेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई न कर, फिर ऐसी गुंडागर्दी करने का खुला न्योता दे दिया जाएगा।