मिडिया पर हमला – संविधान पर हमला
धर्म रक्षक या धर्म भक्षक
नई दिल्ली। झंडेवालान स्थित विडियोकान टावर में स्थित हेडलाइंस टुडे के दफ्तर पर हमला ना सिर्फ मिडिया की स्तंत्रता पर एक कुठाराघात है बल्कि यह भारतीय संविधान का हनन है। देश की राजधानी दिल्ली के मध्य में स्थित झंडेवालान इलाके का वह इमारत यानि विडियोकान टावर, जहाँ टीवी टुडे ग्रुप के विभिन्न चैनल आजतक, तेज एवं हेडलाइंस टुडे का स्टूडियो व दफ्तर है, शुक्रवार की शाम जब राष्ट्रीय स्वयं सेवक के कार्यकर्ताओं ने हमला बोला, तो यहाँ का नजारा बहुत ही खौफनाक एवं शर्मनाक था। करीब 200 से अधिक की संख्या में संघ सेवक का चोला पहन आए देश के इन गुंडों ने तोड़-फोड़ कर ह सावित कर दिया कि वे धर्म रक्षक नहीं बल्कि धर्म भक्षक हैं।
गुरूवार रात हेडलाइंस टुडे पर दिखाए गए एक स्ट्रींग आपरेशन के विरोध में स प्रकार की दानवीय हरकत इस स्ट्रींग ऐपरेशन की वास्तविकता को दर्शाता है। इतना ही नहीमं हिन्दुत्व की दुहाई देने वाले इन संघ सेवकों में हिन्दुत्व तो क्या मानवता भी नहीं दिखाई देती है।
मिडिया पर हमला यह पहली बार नहीं है। इससे पूर्व भी कई बार व कई रूपों में मिडिया पर हमले होते रहे हैं। बात चाहे पिछले दिनों मुंबई में शिवसैनिकों द्वारा आईबीएन लोकमत के दफ्तर पर हुए हमले की हो, अथवा बिहार में विधायक अनंत सिंह के आवास के अंदर विधायक महोदय के गुर्गों द्वारा दो मिडियाकर्मी को बंधक बनाने की हो। ये सभी घटनाएँ कहीं न कहीं सच्चाई को छिपाने की कोशिश है। संविधान के चौथे स्तंभ पर इतना बड़ा हमला लोकतंत्र पर कुठाराघात है। इस घटना के बाद कई बड़े सवाल खड़े हो चुके हैं। बहरहाल देखना यह है कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है। मिडयाकर्मियों की सुरक्षा में कोई कड़ा कदम उठाया जाएगा या फिर इन समाज के ठेकेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई न कर, फिर ऐसी गुंडागर्दी करने का खुला न्योता दे दिया जाएगा।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें